सायबर सिटी गुड़गांव के सरकारी अस्पताल के डॉक्टर की लापरवाही के चलते 3 माह के मासूम को अपनी जान गवानी पड़ी।दरअसल मामला 3 दिन पहले का है जब केरल के रहने वाले यह माँ बाप अपने तीन माह के इस मासूम को लेकर गुड़गांव के इस सरकारी अस्पताल में पहुंचे थे ।डॉक्टसर ने बच्चे की गंभीरता को देखते हुए इस मासूम को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में रैफर कर कागज़ी कार्यवाही शुरू कर दी ।लेकिन यह कागज़ी कार्यवाही इतनी लंबी हो गयी कि जब तक इस दुधमुहे मासूम को सफदरजंग ले जाया जाता तब तक इस मासूम की मौत हो चुकी थी।मामला सीएमओ एवं बड़े अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद तुरत फूर्त में इसकी जांच के लिए टीम का गठन कर अपने काम की इतिश्री कर ली।
वही इस मामले में इस तीन माह के मासूम की माँ की माने तो बच्चे को लेकर वो तीन दिन पहले सुबह तकरीबन साढ़े 9 बजे गुड़गांव के इसी सरकारी अस्पताल में पहुंचे थे ।और डॉक्टर्स ने फास्टेड दे बच्चे को यहां से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रैफर कर दिया लेकिन उस समय मौजूद डॉक्टर्स ने बच्चे की गंभीर हालत को देखते हुए भी कोई कारगर कदम समय रहते नही उठाया ।हमे एम्ब्युलेंस में भेज दो दिया गया लेकिन न तो एम्ब्युलेंस में कोई डॉक्टर मौजूद था ।बच्चे को एम्ब्युलेंस में ऑक्सीजन तक नही लगाया गया ।जबकि डॉक्टर्स को मालूम था कि बच्चा ठीक से सांस नही ले पा रहा है।मासूम की माँ ने पूरे अस्पताल प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर डॉक्टर्स ने कागज़ी कार्यवाही से ज्यादा मासूम की जान को एहमियत दी होती तो उनका बच्चा आज इस दुनिया मे होता।
वही इस मामले में सरकारी अस्पताल के पीआरओ डॉक्टर प्रदीप शर्मा की माने तो बच्चे को काफी गंभीर हालत में अस्पताल में लाया गया था और समय रहते रैफर की किया गया था ।एम्ब्युलेंस स्टार्ट न होने के सवाल पर पीआरओ साहब की माने तो मामले की जांच चल रही है।और जल्द ही इस मामले का खुलासा भी कर दिया जाएगा।















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