पीने का पानी बना स्थानीय निवासियों और पशुओं की जान का दुश्मन

गुडगाँव जिला मेवात के अधिकांश गांवों में गर्मियों के दौरान पीने का पानी बना स्थानीय निवासियों और पशुओं की जान का दुश्मन।

पीने के पानी के अंदर  टीडीएस की मात्रा अधिक होने के कारण लोग पेट व दांतों की बीमारियां की चपेट में

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से महज 70 किलोमीटर दूर बसे हरियाणा राज्य के मेवात जिले में पीने के पानी की स्थिति बद से बदतर  बनी हुयी हे जिले में पीने के पानी की स्थिति आम जनता के लिए गंभीर समस्या है।  ये समस्या इसलिए  हे  की अधिकतर गांवों में भूजल – गहरा और खारा है। गर्मियों में तो स्थानीय निवासी तो दूर यहा  के पशुओं की भी जान पर बन आती है। गंभीर बात तो यह है कि अधिकतर गांवों के पानी में टीडीएस की मात्रा अधिक होने के कारण पेट व दांतों की बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। लोगों को प्यास बुझाने के लिए टेंकरों पर आधारित रहना पड़ रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग भी माने तो अरावली पर्वत माला की कुछ बैल्ट में ही पीने का पानी बढ़िया है। जमीनी वाटर अधिकतर गांवों में खराब है।

डॉक्टर राशिदा।

जनस्वास्थ्य विभाग की लैब में जब पिने के पानी के सैम्पल जांच के लिए लाये गए थे। जिसमे टीडीएस की मात्रा अधिक पाई गयी  भूमिगत जल खारा ,और  गहरा हे जो  स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो चूका  हे  नगीना तथा पुन्हाना खंड में तो हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।

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